Home बिहार नीतीश ने छीनीं चिराग की 5 सीटें, NDA में बढ़ी टेंशन

नीतीश ने छीनीं चिराग की 5 सीटें, NDA में बढ़ी टेंशन

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Nitish snatches Chirag's 5 seats, increasing tension in NDA

पटना: भाजपा के सबसे बड़े रणनीतिकार माने जाने वाले अमित शाह बिहार में फेल हो गये। सीट शेयरिंग के व्यवहारिक फैसलों के कारण अब इस ‘चाणक्य’ की किरकिरी हो रही है। नीतीश कुमार के करीबी माने जाने वाले धर्मेंद्र प्रधान भी नाकाम रहे। सबसे अधिक नाराज नीतीश कुमार ही हैं। विनोद तावड़े पिछले एक साल से भाजपा के लिए अनुकूल परिस्थतियां बनाने में लगे हुए थे। ये कोशिश भी बेकार साबित हुईं। मतलब भाजपा की चुनाव प्रबंधन टीम आश्चर्यजनक रूप से असफल रही। बिहार एनडीए में ऐसा पहली बार हुआ कि बिना साझा प्रेस कांफ्रेंस किये ही उम्मीदवार घोषित हो रहे हैं। सिम्बल बांटे जा रहे हैं। यहां तक कि नामांकन भी हो रहा है। एनडीए की खोखली एकता अब उजागर हो गयी है। अरसे बाद नीतीश कुमार नाराज हुए हैं। यह बिहार एनडीए की सेहत के लिए ठीक नहीं है। भाजपा चुनाव प्रबंधन टीम को लीड कर रहे अमित शाह ऐसी गलतियां करेंगे, नीतीश कुमार को भरोसा नहीं था। नाराज नीतीश कुमार ने जवाबी हमला शुरू कर दिया है। जदयू ने लोजपा को मिली 5 सीटें छीन ली हैं। मोरवा, गायघाट, राजगीर, सोनबरसा और एकमा।

राजगीर के मौजूदा विधायक कौशल किशोर और सोनबरसा के विधायक और मंत्री रत्नेश सदा को जदयू का सिंबल मिल भी गया है। इसके अलावा जदयू ने पूर्व विधायक धूमल सिंह को भी एकमा से सिंबल दिया है। जदयू ने इसके साथ ही अगले ही दिन बुधवार को अपनी लिस्ट जारी कर चिराग की डिमांडेट सीटों पर अपने उम्मीदवारों की दावेदारी भी फिक्स कर दी। दूसरी तरफ जीतन राम मांझी ने भी ऐलान किया है कि वह चिराग को मिले मखदुमपुर सीट पर अपना प्रत्याशी भी उतारेंगे। यानी अब एनडीए में खुल्लम खुल्ला लड़ाई शुरू हो गयी है। इसके बाद भी भाजपा ऑल इज वेल की रट लगाये हुए है। जदयू का सबसे बड़ा एतराज है कि जब शुरू में चिराग पासवान को 22 सीटें देने की बात हुई थी तब कैसे उन्हें 29 सीटें मिल गयीं। सीट शेयरिंग की बात जब तक पटना में चल रही थी तब अंदरखाने में चिराग को 22 सीटें देने पर ही सहमति थी। लेकिन जैसे ही वार्ता का दौर दिल्ली शिफ्ट हुआ चिराग को अचानक 29 सीटें मिल गयीं।

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जदयू के मुताबिक- चिराग पासवान, जीतन राम मांझी और उपेन्द्र कुशवाहा का गठबंधन भाजपा से है। जदयू इसमें कहीं नहीं है। जदयू का गठबंधन केवल भाजपा से है। पासवान, मांझी और कुशवाहा को संभालना, भाजपा की जिम्मेदारी थी। भाजपा को ही अपने कोटे से इन्हें सीट दिया जाना था। तो फिर भाजपा ने क्या किया? दिल्ली में अमित शाह टिकट वितरण प्रक्रिया में प्रमुख भूमिका निभा रहे थे। इसमें सभी दलों के प्रतिनिधि शामिल थे। तय था कि भाजपा अपने कोटे से पासवान, मांझी और कुशवाहा को टिकट देगी। लेकिन जब उसने चिराग को 22 की जगह 29 सीटें दीं तो 7 बढ़ी हुईं सीटें अपने कोटे की बजाय जदयू कोटे की दे दीं। अमित शाह, धर्मेंद्र प्रधान और विनोद तावड़े जैसे अनुभवी नेताओं के रहते ये चूक कैसे हो गयी। अगर भाजपा इतनी ही मेहरबान थी तो वह चिराग को अपने हिस्से की सीटे दे देती। जदयू की सीटिंग सीट कोई दूसरा कैसे ले सकता है? इस मौके पर जदयू के प्रतिनिधि (संजय झा) ने भी दल का उचित पक्ष नहीं रखा। पहली नजर में ये गलती जदयू को धोखा भी लग सकती है।

इसलिए अब उसने सुरक्षा के लिहाज से सख्त कदम उठा लिया है। इस पूरी प्रकिया में जदयू के मन में कहीं न कहीं संदेह पैदा हुआ है। अब उसे अपने सहयोगियों पर पूरा भरोसा नहीं। इसलिए वह हर बात साफ-साफ रखना चाहती है। इसी बात को ध्यान में रख कर जदयू ने अपने सहयोगियों के सामने एक नयी शर्त रख दी है। उसने कहा है, भाजपा समेत सभी घटक दल विधिवत रूप से नीतीश कुमार को सीएम फेस घोषित करें। यानी कागजी तौर पर पक्का कर दें कि बहुमत मिलने पर नीतीश कुमार ही फिर मुख्यमंत्री बनेंगे। मुंहजबानी कुछ नहीं चलेगा। बिहार एनडीए के इतिहास में ऐसा पहली बार हो रहा है नीतीश कुमार सीएम आवास से अपने प्रत्याशियों को सिंबल बांट रहे थे। भाजपा ने मंगलवार को अपनी पहली सूची जारी कर दी। लेकिन नीतीश ने बिना सूची जारी किये ही उम्मीदवारों को चुनाव चिह्न देना शुरू कर दिया। हालांकि बुधवार को जदयू ने भी अपनी लिस्ट जारी कर दी। लेकिन ये बहुत बड़ा बदलाव है जो NDA के लिए ठीक नहीं है। चिराग के कारण भाजपा अकेली पड़ती जा रही है। जीतन राम मांझी ने नीतीश कुमार की नाराजगी को सही ठहराया है। उपेन्द्र कुशवाहा साफ-साफ कह रहे हैं कि गठबंधन में सब कुछ ठीक नहीं है। यानी जो भाजपा की जिम्मेदारी थे, उसी से सहयोगी खुश नहीं है। क्या अमित शाह ने बिना सोचे समझे सीट बंटवारे की सूची को मंजूरी दे दी ?

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