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सीट बंटवारे पर नाराज चिराग ने एनडीए में लगाई ‘आग’, नीतीश ने JDU नेताओं से पूछे तीखे सवाल

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Angry over seat-sharing, Chirag ignites fire within NDA; Nitish asks sharp questions to JDU leaders

पटना: क्या एनडीए टूट जाएगा ? अब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और चिराग पासवान के बीच आमने सामने की लड़ाई शुरू हो गयी है। एनडीए में सहयोग और समन्वय की जो भावना बनी थी, वह चिराग की जिद की वजह से खत्म होने की कगार पर है। सोमवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सख्त नाराजगी के कारण ही एनडीए की साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस रद्द करनी पड़ी थी। उपेन्द्र कुशवाहा और जीतन राम मांझी भी चिराग पासवान को अधिक तवज्जो दिये जाने से नाराज हैं। कोई खुल कर तो नहीं कह रहा, लेकिन ये नेता अंदर ही अंदर भाजपा पर भड़के हुए हैं। इनका कहना है कि हम चिराग के बिना भी जीत कर सत्ता हासिल कर चुके हैं। फिर इतने मान-मनौव्वल की क्या जरूरत है। घटल दलों की नाराजगी शेरो शायरी से बाहर आ रही है। ठंडी जुबान में तल्खी बातें कही जा रही हैं। हालांकि नीतीश कुमार ने भाजपा या अन्य सहयोगी दलों पर कुछ नहीं कहा है।

लेकिन उन्होंने अपने दल के उन नेताओं को तलब किया है, जो सीट शेयरिंग में पार्टी का प्रतिनिधित्व कर रहे थे। उन्होंने नाराजगी के साथ पूछा कि जदयू की जीती हुई सीटें और परम्परागत सीटें कैसे दूसरे दलों को देने की बात तय हो गयी ? ऐसा कैसे हुआ ? इसे ठीक कराइए, फिर बात कीजिए। चिराग पासवान को 29 सीटें दिये जाने के बाद अब विवाद इस बात पर भड़क गया है कि वे जदयू की चार सीटिंग सीटें मांग रहे हैं। बिना समन्वय बनाये इन सीटों पर उम्मीदवार भी तय कर दिये हैं। सीट बंटवारे में चिराग, भाजपा की जिम्मेदारी थे। जदयू इसमें कहीं नहीं था। लेकिन इसके बाद भी जदयू की सीटिंग सीटों पर हक जताना, चिराग की मनमानी के रूप में देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री जदयू के हैं। वह बड़ी पार्टी है। फिर कैसे वह अपनी जीती हुईं सीटें चिराग के लिए छोड़ सकती है। जदयू का कहना है, एनडीए में रह कर, अधिक सीटें लेकर भी चिराग टकराव का रास्ता अपनाये हुए हैं। सोनबरसा विधानसभा क्षेत्र से जदयू के विधायक रत्नेश सदा नीतीश सरकार में मंत्री हैं। इसके बावजूद चिराग ने इस सीट पर दावा कर दिया।

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अब तो यहां टकराव की स्थिति पैदा हो गयी है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कठोर रुख दिखाते हुए इस सीट पर रत्नेश सदा को सिम्बल भी दे दिया है। यानी नीतीश कुमार इस सीट पर कोई समझौता नहीं कर सकते। चिराग माने या न माने इससे उन पर कोई फर्क नहीं पड़ता। दूसरी तरफ चिराग ने सोनबरसा सीट पर रीना पासवान को उतारने का संकेत दे दिया है। ऐसी स्थिति में या तो फ्रेंडली फाइट होगी या फिर एनडीए टूट जाएगा। नीतीश कुमार की अब तक जो राजनीति रही हैं, उसके हिसाब से वे फ्रेंडली फाइट कभी पसंद नहीं करेंगे। चिराग को ही हकीकत समझनी होगी। इसी तरह राजगीर सुरक्षित सीट भी जदयू के कब्जे में है। कौशल किशोर यहां से विधायक हैं। इस सीट पर चिराग ने दावा ठोक कर प्रत्याशी का चयन भी कर लिया है। लोजपा आर की तरफ से परशुराम पासवान को टिकट दिये जाने की चर्चा है।

तारापुर सीट को लेकर नीतीश कुमार नाराज हैं। इस सीट पर 2020 में जदयू के मेवालाल चौधरी जीते थे। उनके इस्तीफे के बाद उपचुनाव हुआ तो जदयू के राजीव कुमार सिंह ने चुनाव जीता। यह सीट 2010 से ही जदयू के कब्जे में है। ऐसी स्थिति में तारापुर सीट पर चिराग की दावेदारी से मामला बिगड़ गया है। समस्तीपुर की मोरवा सीट को भी जदयू अपनी परम्परागत सीट मानता है। इस सीट पर चिराग ने प्रत्याशी तय कर दिया है। पिछले चुनाव में हिलसा सीट सबसे अधिक चर्चा में रही थी। इस सीट पर जदयू के कृष्ण मुरारी शरण ने केवल 12 वोटों से जीत दर्ज की थी। पिछले चुनाव में सबसे कम मार्जिन से यहां चुनाव जीतने का रिकॉर्ड बना था।

राजद के शक्ति सिंह यादव यहां चुनाव हार गये थे। चिराग ने इस सीट को भी अपनी सूची में शामिल कर लिया है। लोजपा (आर) की तरफ से रंजीत डॉन की पत्नी दीपिका कुमारी को लड़ाये जाने की चर्चा है। मखदुमपुर जीतन राम मांझी की परम्परागत सीट है। वे 2010 का विधानसभा चुनाव जीत चुके हैं। वे तब जदयू में थे। 2015 में वे हम उम्मीदवार के रूप में यहां से चुनाव हार गये थे। 2020 में इस सीट जीतन राम मांझी के उम्मीदवार ने ही चुनाव लड़ा था। ‘हम’ के देवेन्द्र कुमार राजद के सतीश कुमार से चुनाव हार गये थे। पिछले तीन चुनाव से जीतन राम मांझी इस सीट पर सक्रिय रहे हैं। लेकिन चिराग ने यहां से रानी चौधरी को उम्मीदवार तय कर झगड़ा बढ़ा दिया है। घटल दलों का आरोप है कि चिराग अपने सहयोगी दलों की सीटों पर दावा कर गठबंधन को कमजोर कर रहे हैं।

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