
पटना/ नई दिल्ली: में दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट में प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट के तहत लालू यादव के खिलाफ आरोप तय किए गए। तेजस्वी यादव और राबड़ी देवी पर यह एक्ट नहीं लगेगा। लालू यादव पर आरोप है कि पद का दुरुपयोग करते हुए रेलवे के टेंडर की शर्तों में हेर-फेर की। कोर्ट ने सभी आरोपियों पर लालू यादव के खिलाफ IPC की धारा 420, 120 B, धारा 13 (2) के साथ जालसाजी के आरोप भी तय किए। आरोप तय करने के बाद कोर्ट ने लालू यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी से पूछा कि क्या आप आरोप स्वीकार करते हैं। लालू परिवार ने कहा कि ‘केस गलत है। हम मुकदमे का सामना करेंगे।’
बता दें, IRCTC घोटाला 2004 से 2009 के बीच लालू प्रसाद यादव के रेल मंत्री कार्यकाल के दौरान हुआ था। लालू यादव पर आरोप लगे हैं कि उन्होंने केंद्रीय मंत्री के पद का दुरुपयोग करते हुए IRCTC के होटलों के रखरखाव के लिए आंवटित ठेकों में करप्शन किया। आरोप है कि IRCTC के दो होटलों बीएनआर रांची और बीएनआर पुरी का रखरखाव ठेका विजय और विनय कोचर के स्वामित्व वाली एक निजी फर्म सुजाता होटल को दिया गया था। सीबीआई का आरोप है कि इस सौदे के बदले में लालू प्रसाद यादव को एक बेनामी कंपनी के माध्यम से तीन एकड़ बेशकीमती ज़मीन मिली थी। सीबीआई ने 7 जुलाई 2017 को लालू यादव के खिलाफ एक प्राथमिकी दर्ज की।
एजेंसी ने पटना, नई दिल्ली, रांची और गुड़गांव में लालू और उनके परिवार के सदस्यों से जुड़े 12 ठिकानों पर छापेमारी भी की। 1 मार्च 2025 को सीबीआई ने लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव और पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रेम चंद गुप्ता व अन्य के खिलाफ आरोपों पर अपनी बहस पूरी की थी। सीबीआई की ओर से विशेष लोक अभियोजक (एसपीपी) डी.पी. सिंह और अधिवक्ता मनु मिश्रा ने दलील दी कि आईआरसीटीसी के दो होटल रखरखाव ठेकों को एक निजी कंपनी को आवंटित करने में आरोपियों की ओर से भ्रष्टाचार और षडयंत्र किया गया था। लालू प्रसाद यादव की ओर से दलील दी गई कि IRCTC भ्रष्टाचार मामले में उनके खिलाफ आरोप तय करने के लिए कोई सबूत नहीं है और वह इस मामले में आरोपमुक्त किए जाने के हकदार हैं।






