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बिहार चुनाव के बीच बाढ़ का कहर, मुजफ्फरपुर से सुपौल तक तबाही — कई जिले प्रभावित

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Floods wreak havoc amid Bihar elections, devastating Muzaffarpur to Supaul – many districts affected

मुजफ्फरपुर: बिहार में होने वाले विधानसभा चुनाव के बीच बाढ़ ने लोगों की टेंशन बढ़ा दी है।नेपाल और बिहार में हुई लगातार भारी बारिश का असर उत्तर बिहार के कई जिलों में दिखाई दे रहा है। मुजफ्फरपुर, सुपौल, सहरसा, सीतामढ़ी, पश्चिमी चंपारण और शिवहर में बागमती, कोसी, गंडक और कमला जैसी नदियों का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर है। कई जगह तटबंधों में रिसाव और टूट की स्थिति बन गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में पानी घरों तक पहुंच चुका है, जिससे लोगों में डर और दहशत का माहौल है। मुजफ्फरपुर जिले के कटरा प्रखंड और रुन्नीसैदपुर के अनंत विशनपुर में बागमती नदी के दक्षिणी तटबंध में छह स्थानों पर रिसाव हुआ।

बकुची पीपा पुल पर पानी चढ़ने से सड़क पर आवाजाही पूरी तरह ठप हो गई। बाढ़ का पानी बकुची मिडिल स्कूल, नवादा बालक स्कूल, गंगेया हाई स्कूल और यूनियन बैंक शाखा तक पहुंच गया। ग्रामीणों के कई घर जलमग्न हैं। सुपौल में कोसी बराज से 5.33 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया, जिससे सदर, मरौना, किशनपुर और सरायगढ़-भपटियाही प्रखंड के निचले इलाकों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया। सोमवार तक सौ से अधिक गांव प्रभावित थे। जल संसाधन विभाग के अभियंता संजीव शैलेश ने बताया कि स्थिति अब नियंत्रण में है और अभियंताओं की टीम गश्त कर रही है। सहरसा के चार प्रखंडों की लगभग 30 पंचायतें बाढ़ से प्रभावित हैं। हजारों एकड़ धान की फसल बर्बाद हो गई है। फारबिसगंज प्रखंड में परमान नदी का बांध टूटने से पिपरा पंचायत के तीन टोले जलमग्न हो गए। जोगबनी स्टेशन पर ट्रेनों का परिचालन आंशिक रूप से शुरू हुआ।

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किशनगंज में महानंदा और कनकई नदियों के जलस्तर में वृद्धि के कारण कई गांवों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर चुका है। कटिहार में महानंदा और गंगा नदियों का जलस्तर बढ़ा है। पश्चिम चंपारण के सिकटा, माजर, धुतहां व अन्य इलाकों में भी बाढ़ का पानी स्कूलों में घुस गया, पढ़ाई प्रभावित हुई। मधुबनी के झंझारपुर में कमला बलान नदी लाल निशान से दो मीटर ऊपर बह रही है। सीतामढ़ी और शिवहर में बागमती नदी के तटबंध पर रिसाव और दबाव के कारण ग्रामीणों में डर का माहौल है। पुल और सड़क संपर्क प्रभावित हुए हैं। राज्य की कुल 21 नदियां (कोसी, बागमती, गंडक, कमला सहित) खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं, जो पिछले 15 वर्षों में पहली बार देखा गया है। प्रशासन अलर्ट मोड में है और अधिकारियों ने तटबंधों पर लगातार कैंप लगाकर स्थिति पर नजर रखी हुई है। इस साल अक्टूबर में नदियों के इस तरह के अप्रत्याशित व्यवहार ने पर्यावरणविदों और प्रशासन दोनों के लिए चिंता में डाल दिया है। कोसी बराज से छोड़ा गया पानी इस साल पिछले वर्षों के आंकड़ों के मुकाबले रिकॉर्ड स्तर का है। बागमती नदी ने भी अपने दूसरे सर्वोच्च जलस्तर का रिकॉर्ड दर्ज किया।

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