बेगूसराय: बिहार के बेगूसराय स्थित 52 शक्तिपीठों में से एक माता जयमंगला मंदिर अब अपने दिव्य स्वरूप में लौट चुका है। अंतिम चरण का काम तेजी से चल रहा है और आगामी विजयादशमी से पहले इसका भव्य रूप पूरी तरह सामने आ जाएगा। मंदिर परिसर में कॉरिडोर के चारों ओर बरामदे पर मिथिला पेंटिंग बनाई गई है। कॉरिडोर में नई टाइल्स लगाई गई हैं। आवश्यकता अनुसार बिजली, पंखे और बल्ब की व्यवस्था की गई है। माता के गर्भगृह के सामने एक विशाल घंटा लगाया गया है, जिससे मंदिर का स्वरूप और भी आकर्षक लग रहा है।
गुंबद को लाल रंग से रंगा गया है और उसके ऊपर मेटल का गुंबद भी लगाया जाएगा। नवरात्रि की रातों में लाइटिंग से मंदिर विशेष रूप से आकर्षक दिखता है। करीब दो साल पहले एक विशाल पेड़ गिरने से मंदिर का बाहरी हिस्सा और गर्भगृह का कुछ भाग क्षतिग्रस्त हो गया था। इसके बाद कोर्ट के आदेश पर मंदिर का पुनर्निर्माण कार्य शुरू हुआ। इसे पूरा होने में लगभग दो साल का समय लगा। डिजाइनर टीम के सदस्य ई. दीपांशु के अनुसार, मंदिर का नक्शा इस तरह तैयार किया गया कि इसका प्राचीन स्वरूप जस का तस बना रहे। शुरुआत में यह निर्माण मंदिर प्रबंधन समिति, सामाजिक कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों की मदद से शुरू हुआ था।
बीच में कुछ कारणों से कार्य बाधित हुआ, लेकिन बाद में इसे तेज गति से पूरा किया गया। इस कार्य में आरकेएस कंस्ट्रक्शन कंपनी का भी अहम योगदान रहा। नवनिर्माण के बाद जयमंगला गढ़ मंदिर परिसर पहले से ज्यादा भव्य और आकर्षक हो गया है। यहां आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने लगी है। मंदिर के आसपास फूड स्टॉल, ई-रिक्शा और खिलौनों की दुकानें खुल गई हैं, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार भी मिल रहा है। नवरात्र में रोजाना हजारों श्रद्धालु माता जयमंगला के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। मंदिर में पूजा-अर्चना और दुर्गा सप्तशती पाठ का विशेष महत्व है। नवनिर्मित कॉरिडोर में दिनभर पाठ का आयोजन हो रहा है, जिससे श्रद्धालुओं को काफी सहूलियत हो रही है।







