पटना: पहले चरण तक सब कुछ गुपचुप रहा। दूसरे चरण में खुसुर-फुसुर शुरू हुई और अंतिम चरण में बात कान-ओ-कान फैल गई है। बात यह कि ”वोटर अधिकार यात्रा” के दौरान राहुल गांधी की खुफिया टीम रेकी में लगी हुई है। यह टीम बिहार में कांग्रेस की जमीन के साथ कांग्रेस-जनों के दम-खम का आकलन कर रही। रेकी टीम के सदस्य कांग्रेस सहित महागठबंधन के दूसरे घटक दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं से हेलमेल बढ़ाते हुए गूढ़ बातें पता कर ले रहे। मूलत: सक्रियता के साथ योग्यता और क्षमता का आकलन हो रहा।
नेतृत्व की कसौटी पर विफल माने जाने वाले पिछली कतार में किए जा सकते हैं। रेकी टीम का पूरा काम अनचीन्हा-अनजान बनकर चल रहा। पिछले दो चरणों की यात्रा में इसने मार्के की कई बातों का पता लगा लिया है। राहुल की निजी टीम एक-एक ब्योरा और आंकड़ा को ऑनलाइन संजोती जा रही। इस टीम में अपने-अपने विषय के सिद्धस्त लोग हैं, जो यात्रा के दौरान वैनिटी बस को ही कार्यालय बनाए हुए हैं। आवश्यक होने पर राहुल तक एक-एक बात तत्काल पहुंचा दी जा रही है। बाकी ब्योरा भविष्य की रणनीति के लिए संग्रहित कर लिए जा रहे।
रेकी टीम में छत्तीसगढ़, झारखंड और कर्नाटक के लोगों की बहुलता है। इक्के-दुक्के बिहार के भी हैं। विश्वस्त सूत्रों के अनुसार, बिहार कांग्रेस में खींचतान, प्रमुख पद धारकों के प्रभाव-हीन व्यक्तित्व, कांग्रेस के भीतर दूसरे दलों के शुभचिंतक और महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में नेतृत्व को चेहरा दिखाकर लापता हो जाने वाले दर्जनों कांग्रेसियों की सूची तैयार है। यात्रा के समापन के बाद रेकी टीम की उपलब्धि का पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन तैयार होगा, जिसे नेतृत्व में पहली पंक्ति के दिग्गजों के साथ राहुल देखेंगे-समझेंगे और उसके बाद आगे की रणनीति तय होगी। जिलों में लगाए गए आबजर्वर भी स्थानीय स्तर पर रेकी कर सूचनाएं पहुंचा रहे हैं।







