Home बिहार जिले में 18 अगस्त से शुरू होगा नाइट ब्लड सर्वे, लोगों को...

जिले में 18 अगस्त से शुरू होगा नाइट ब्लड सर्वे, लोगों को करें जागरूक: डॉ. शैलेन्द्र

444
0
Night blood survey will start in the district from August 18, make people aware: Dr. Shailendra

बक्सर। जिले में फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के तहत आगामी 10 फरवरी से सर्वजन दवा सेवन कार्यक्रम (एमडीए) का संचालन होना है। इसके पूर्व सभी प्रखंडों में फाइलेरिया प्रसार की जांच के लिए नाइट ब्लड सर्वे (एनबीएस) किया जाएगा। इसके लिए 18 अगस्त से बक्सर जिले के सभी प्रखंडों में एनबीएस शुरू किया जाएगा। इसकी तैयारी जिला स्तर पर शुरू कर दी गई है। इस क्रम में शुक्रवार को जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यालय के द्वारा पुराना सदर अस्पताल परिसर स्थित पारा मेडिकल संस्थान के सभागार में एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान एनबीएस के चयनित पंचायतों की सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी, आशा फैसिलिटेटर व आशा कार्यकर्ताओं के अलावा बीएचएम, बीसीएम, वीबीडीएस व लैब टेक्नीशियन को एनबीएस की महत्ता और बारीकियों से अवगत कराया गया।

प्रशिक्षण की शुरुआत करते हुए जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. शैलेन्द्र कुमार ने बताया कि एमडीए के पूर्व एनबीएस करना बहुत जरूरी होता है, क्योंकि इससे प्रखंडों में फाइलेरिया के प्रसार दर की जानकारी मिलती है। जिसके आधार पर उक्त प्रखंड में एमडीए के संचालन का निर्णय लिया जाता है। यदि एनबीएस में माइक्रो फाइलेरिया का प्रसार दर किसी प्रखंड में एक या उससे अधिक प्रतिशत रहा तो वहां एमडीए का संचालन किया जाता है। वहीं, यदि किसी प्रखंड में प्रसार दर एक प्रतिशत से कम होता है तो वहां एमडीए का संचालन नहीं किया जाएगा।

GNSU Admission Open 2026

डॉ. शैलेन्द्र कुमार ने बताया कि सेंटिनल साइट्स का चयन प्रखंडों में फाइलेरिया मरीजों के आधार पर किया गया है। इनमें सदर प्रखंड के शहरी क्षेत्र में पांडेय पट्टी, बक्सर ग्रामीण क्षेत्र में दहिवर, इटाढी प्रखंड में कुकुड़ा, राजपुर के तियरा, चौसा के सोनपा, सिमरी प्रखंड के सिमरी, डुमरांव प्रखंड के आरियांव, ब्रह्मपुर के देवकुली, चौगाईं के पांडेयपुर, चक्की के भोला डेरा, नावानगर के गिरिधर बरांव व केसठ के स्थानीय पंचायत में सेंटिनल साइट्स बनाए जाएंगे। इनके अलावा सभी प्रखंडों में रैंडम साइट्स का भी चयन किया जा चुका है। इनमें क्रमशः मुसाफिर गंज वार्ड नंबर 13, जासो, हरपुर जलवासी, मंगरांव, पवनी, डुमरी, कोरान सराय, रघुनाथपुर, मसरहियां, अरक, आथर व रामपुर पंचायत का चयन किया गया है। उन्होंने बताया कि नाइट ब्लड सर्वे के लिए जरूरी है कि इसके लिए जिन दो गांवों का चयन किया जाए, वहां के मुखिया समेत सभी जनप्रतिनिधि, जीविका, आंगनबाड़ी केंद्रों की सेविकाओं समेत सभी सहयोगी संस्थाओं के सदस्यों के साथ बैठक कर एनबीएस व उसकी तैयारियों की चर्चा करें। जिसके बाद चयनित गांवों के एक एक घरों में जाकर लोगों को एनबीएस व उसके महत्वों की जानकारी दें। ताकि, लोगों इसके प्रति जागरूक हो और एमबीएस में अपना सहयोग दें।

डॉ. शैलेन्द्र कुमार ने बताया कि एनबीएस के दौरान सेंटिनल और रैंडम साइट्स पर रात में शिविर लगाकर लोगों का ब्लड सैंपल लिया जाता है। इसके लिए रात 8:30 बजे से 12 बजे तक शिविर लगाकर 300-300 लोगों का ब्लड सैंपल लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि फाइलेरिया के शुरुआती दौर में फाइलेरिया के कीटाणु लोगों के शरीर में छिपे रहते हैं, जो रात में ही एक्टिव होते हैं। रात में ही लोगों के शरीर के ब्लड सैंपल सही तरीके से लेकर माइक्रोस्कोप द्वारा उसकी सही तरह से जांच करने पर फाइलेरिया कीटाणु की पहचान हो सकती है। इसकी पहचान के लिए लोगों के ब्लड सैंपल का थिकनेस महत्वपूर्ण है। शिविर में लिए गए ब्लड सैंपल की 24 घंटे में जांच होने पर उसमें शामिल माइक्रो फाइलेरिया की पहचान हो सकती है। उन्होंने बताया कि सरकार के निर्देशों के अनुसार एनबीएस में स्थानीय स्कूलों के प्रधानाचार्यों, शिक्षकों और स्थानीय प्रतिनिधियों का सहयोग लेना है। जिनके माध्यम से नाइट ब्लड सर्वे से पूर्व चयनित स्थल पर लाइट व अन्य मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित कर लें। ताकि, एनबीएस का सफल संचालन किया जा सके। साथ ही, उक्त गांवों में बैनर व पोस्टर के माध्यम से भी लोगों को जागरूक करें। जिससे ज्यादा से ज्यादा लोगों को प्रेरित कर उनका ब्लड सैंपल लिया जा सके। इस दौरान वीडीसीओ पंकज कुमार, एफएलए रजनीश राय, पीरामल फाउंडेशन व सीएफएआर के अलावा स्वास्थ्य अधिकारी व कर्मी मौजूद रहे।

GNSU Admission Open 2026