
पटना: पटना जिले के फुलवारीशरीफ एम्स पटना में इलाज कराने पहुंचे विधायक और उनके सुरक्षाकर्मियों द्वारा रेजिडेंट डॉक्टरों और सुरक्षा गार्ड पर कथित हमले के विरोध में रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (आरडीए) ने बड़ा कदम उठाया है। डॉक्टरों ने सभी वैकल्पिक (इलेक्टिव) सेवाओं को तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया है और 1 अगस्त को सुबह 9 बजे तक मांगें पूरी नहीं होने की स्थिति में आपात सेवाएं भी ठप करने का ऐलान किया है।
रेजिडेंट डॉक्टर्स द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि यह निर्णय उन्होंने मजबूरी में लिया है, क्योंकि घटना के बाद अब तक न तो एफआईआर दर्ज की गई है और न ही प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई की गई है। 30 जुलाई की रात करीब 11 बजे एम्स पटना के ट्रॉमा सेंटर में शिवहर के विधायक चेतन आनंद, उनकी पत्नी डॉ. आयुषी सिंह और उनके सुरक्षाकर्मी कथित तौर पर जबरन घुस आए। रेजिडेंट डॉक्टर्स का आरोप है कि विधायक पक्ष ने वहां तैनात सुरक्षा गार्ड के साथ मारपीट की, डॉक्टरों को जान से मारने की धमकी दी और अस्पताल परिसर में हथियार लहराया। एक सुरक्षा गार्ड को कथित तौर पर बंदूक की बट से मारा गया जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया।
रेजिडेंट डॉक्टर्स ने कहा कि यह न केवल अस्पताल की सुरक्षा पर सवाल है, बल्कि स्वास्थ्यकर्मियों के सम्मान और जान की भी बात है। उनका कहना है कि इस हमले के बाद से अस्पताल में कार्यरत डॉक्टरों और कर्मियों में भय और असुरक्षा का माहौल है। रेजिडेंट डॉक्टर्स ने साफ तौर पर कहा है कि अगर तय समय तक उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो 1 अगस्त की सुबह 9 बजे से आपात सेवाएं भी पूरी तरह बंद कर दी जाएंगी। इसके बाद सेवा बाधित होने की सारी जिम्मेदारी प्रशासन और संबंधित अधिकारियों की होगी। डॉक्टरों ने कहा कि वे मरीजों की सेवा को प्राथमिकता देते हैं, लेकिन जान और सम्मान के साथ कोई समझौता नहीं किया जा सकता। यदि अस्पताल परिसर में ही डॉक्टर असुरक्षित हैं तो काम करना असंभव है। यह मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है और यदि समय रहते प्रशासन ने कार्रवाई नहीं की, तो स्वास्थ्य सेवाओं पर इसका गंभीर असर पड़ सकता है।






