वैशाली: जैसलमेर में तैनात भारतीय सेना के जवान पंकज कुमार रजक (40 वर्ष) की मौत फायरिंग प्रशिक्षण के दौरान टैंक में पानी भरने से हो गई। वे बिहार के वैशाली जिले के भगवानपुर प्रखंड के सराय थाना अंतर्गत पौड़ा मदन सिंह गांव के रहने वाले थे। परिजनों के अनुसार, 7 जुलाई को प्रशिक्षण के दौरान पंकज कुमार को अचेत अवस्था में पाया गया। जैसे ही इसकी सूचना परिजनों को मिली, वे तुरंत राजस्थान रवाना हो गए। जवान को अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां 16 जुलाई को इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
शहीद का पार्थिव शरीर 19 जुलाई की सुबह गांव लाया गया, जहां उनके अंतिम दर्शन के लिए हजारों की भीड़ उमड़ पड़ी। पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई है। आसपास के गांवों से भी बड़ी संख्या में लोग श्रद्धांजलि देने पहुंचे। गांव में जगह-जगह “शहीद जवान अमर रहें” के पोस्टर लगाए गए हैं। स्थानीय प्रशासन भी मौके पर मौजूद रहा। शहीद जवान का अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ हाजीपुर के कौनहारा घाट पर किया जाएगा। भारतीय सेना की ओर से पार्थिव शरीर को गार्ड ऑफ ऑनर के साथ विदाई दी जाएगी। पंकज कुमार ने 13 साल पहले सेना में अपनी सेवा की शुरुआत की थी।
एक वर्ष बाद उनकी शादी हाजीपुर के अकिलाबाद निवासी एक युवती से हुई थी। वे 25 अप्रैल को एक महीने की छुट्टी पर अपने घर आए थे, लेकिन 15 दिन बाद ही आपात स्थिति में उन्हें वापस बुला लिया गया था। पंकज कुमार के पिता मनोज रजक पंजाब की एक निजी कंपनी में कार्यरत हैं, जबकि उनके दादा महेश रजक बीएसएफ में एसआई के पद से सेवानिवृत्त हैं। जवान के परिवार में एक डेढ़ साल का बेटा भी है। उनके छोटे भाई विपिन कुमार ने बताया कि भारत-पाक युद्ध के समय पंकज ने परिवार से कहा था कि घर-परिवार की देखभाल अच्छे से करना। अब वे इस दुनिया में नहीं हैं। परिवार, रिश्तेदार और गांव वाले उनके जाने से स्तब्ध हैं। शहीद को श्रद्धांजलि देने के लिए क्षेत्रीय विधायक संजय सिंह भी उनके घर पहुंचे और परिजनों से मुलाकात कर संवेदना व्यक्त की।







