नई दिल्ली: भारतीय अंतरिक्ष यात्री सुधांशु शुक्ला सहित तीन अन्य एस्ट्रोनॉट 18 दिन की ऐतिहासिक अंतरिक्ष यात्रा के बाद मंगलवार को भारतीय समयानुसार शाम तीन बजकर 1 मिनट पर सफलतापूर्वक पृथ्वी पर लैंड कर गए। स्पेसएक्स के ड्रैगन अंतरिक्ष यान ने कैलिफोर्निया तट के पास समुद्र में सुरक्षित स्प्लेशडाउन किया। चारों एस्ट्रोनॉट 14 जुलाई को शाम 4:45 पर इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन से पृथ्वी के लिए रवाना हुए थे। करीब 23 घंटे के सफर के बाद ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट 15 जुलाई को दोपहर 3:00 बजे कैलिफोर्निया के तट पर लैंडिंग हुई। रिपोर्ट के अनुसार शुभांशु शुक्ला 17 अगस्त तक भारत लौट सकते हैं। बता दे की अंतरिक्ष यात्रियों को लैंडिंग के बाद मेडिकल जांच और रिहैबिलिटेशन के लिए आमतौर पर सात दिन लगते हैं, ताकि वह पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण में फिर से ढल सके।
इसके बाद ही शुभांशु शुक्ला भारत लौटेंगे। 39 वर्षीय शुभांशु शुक्ला अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन पर कदम रखने वाले पहले भारतीय और राकेश शर्मा के बाद अंतरिक्ष में जाने वाले दूसरे भारतीय बने हैं। उनका ऐतिहासिक उड़ान 25 जून को कनाडा स्पेस सेंटर से स्पेस एक्स फाल्कन 9 रॉकेट के जरिए शुरू हुई और 18 दिन बाद सफलतापूर्वक पृथ्वी पर लौटकर पूरी हुई। अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन पर 18 दिनों में शुभांशु शुक्ला और उनके साथियों ने 60 से ज्यादा प्रयोग किया जो अंतरिक्ष तकनीक के क्षेत्र में बड़े कारगर साबित हो सकते हैं। वही शुभांशु शुक्ला ने मेडिसिन, कृषि और अंतरिक्ष तकनीक को लेकर कई प्रयोग किया। उन्होंने पता लगाने की कोशिश किया कि आखिर अंतरिक्ष में पौधे कैसे उगाए जा सकते हैं। इसके अलावा अंतरिक्ष में मानव शरीर में कौन से परिवर्तन होते हैं। अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन पर शुभांशु शुक्ला ने कम से कम 7 ऐसे प्रयोग किए जो की गगनयान मिशन में बड़े सहयोगी साबित हो सकते हैं। इसमें अंतरिक्ष में विपरीत परिस्थितियों में जीवित रहने, मसल्स पर पड़ने वाले असर, बीजों को उगाने, ऑक्सीजन प्रोडक्शन, फ्यूल और भोजन की व्यवस्था और स्क्रीन टाइम जैसे प्रयोग शामिल है। इधर शुभांशु शुक्ला की वापसी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुभांशु शुक्ला का उनके ऐतिहासिक अंतरिक्ष यात्रा से पृथ्वी वापसी के लिए स्वागत किया।







