
महाराष्ट्र: महाराष्ट्र की राजनीति में शनिवार को एक बड़ा मोड़ आया। लंबे समय बाद उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे ने एक साथ सार्वजनिक मंच साझा किया। यह ‘विजय रैली’ मुंबई के वर्ली इलाके में एनएससीआई डोम में आयोजित की गई, जहां इन दोनों नेताओं ने महाराष्ट्र सरकार की तीन-भाषा नीति को वापस लेने की खुशी में लोगों को संबोधित किया।
शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे अपने बेटे और पार्टी नेता आदित्य ठाकरे के साथ अपने निवास ‘मातोश्री’ से उस स्थान के लिए रवाना हुए, जहां शिवसेना (यूबीटी) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) का एक संयुक्त कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) राज ठाकरे अपने निवास ‘शिवतीर्थ’ से कार्यक्रम स्थल के लिए रवाना हुए, जहां शिवसेना (यूबीटी) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) का एक संयुक्त कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है।
इससे पहले रैली की पूर्व संध्या पर ठाणे में मनसे और शिवसेना यूबीटी कार्यकर्ताओं ने मिलकर लड्डू बांटे। ढोल-ताशों के साथ लोगों को मिठाइयां बांटी गईं और सड़कों पर बड़े-बड़े पोस्टरों में उद्धव और राज ठाकरे साथ दिखे। वहीं कोली समाज ने ठाणे के आई एकविरा मंदिर में विशेष पूजा की और ठाकरे बंधुओं की एकता की प्रार्थना की।
उद्धव ठाकरे (शिवसेना यूबीटी) और राज ठाकरे (मनसे) अब इसे जनता की जीत मानते हुए शनिवार को विजय उत्सव मना रहे हैं। यह आयोजन वर्ली के एनएससीआई डोम में होगा, जो आदित्य ठाकरे का विधानसभा क्षेत्र भी है। इस मौके पर कोई पार्टी झंडा, चुनाव चिह्न या झंडा इस्तेमाल नहीं किया जाएगा, लेकिन इस एकता का राजनीतिक संदेश साफ है। दोनों ठाकरे भाई आखिरी बार 2005 में मालवण उपचुनाव के दौरान एक साथ मंच पर आए थे। उसी साल राज ठाकरे ने शिवसेना छोड़कर 2006 में अपनी पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना बनाई थी।






