राष्ट्रीय: एनसीपी (शरद पवार गुट) के अध्यक्ष शरद पवार ने गुरुवार को स्पष्ट रूप से कहा कि महाराष्ट्र में पहली कक्षा से हिंदी भाषा को अनिवार्य बनाना ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर किसी नई भाषा को शिक्षा में शामिल करना है तो वह कक्षा 5 के बाद ही होनी चाहिए। शरद पवार ने कहा, ‘प्राथमिक शिक्षा में हिंदी को अनिवार्य बनाना सही नहीं है। कक्षा 5 के बाद हिंदी पढ़ाई जाए, इसमें कोई आपत्ति नहीं है। देश का एक बड़ा हिस्सा हिंदी बोलता है, इसलिए इसे पूरी तरह नजरअंदाज़ नहीं किया जा सकता।
लेकिन छोटे बच्चों पर नई भाषाओं का बोझ डालना उचित नहीं है।’ पवार का यह बयान महाराष्ट्र सरकार के उस संशोधित आदेश के बाद आया है, जिसमें कहा गया है कि हिंदी को कक्षा 1 से 5 तक तीसरी भाषा के रूप में पढ़ाया जाएगा। पवार ने इसे लेकर चिंता जताते हुए कहा कि प्राथमिक शिक्षा में मातृभाषा को प्राथमिकता मिलनी चाहिए और माता-पिता को यह तय करने का अधिकार होना चाहिए कि बच्चे को हिंदी पढ़नी है या नहीं। उन्होंने कहा, “अगर हम बच्चों पर दूसरी भाषा थोपेंगे और उसकी वजह से मातृभाषा को नजरअंदाज करेंगे, तो यह उचित नहीं होगा। सरकार को हिंदी को पहली कक्षा से अनिवार्य बनाने का निर्णय वापस लेना चाहिए।”
शरद पवार ने इस मुद्दे पर उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के रुख का समर्थन किया और कहा कि मराठी भाषी समाज को इस मुद्दे पर एक साथ आना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह अच्छा संकेत होगा अगर मराठी समाज अपनी भाषा और संस्कृति के लिए एकजुट होकर खड़ा होता है। उल्लेखनीय है कि ठाकरे बंधु पहले ही बीजेपी सरकार पर भाषा के नाम पर समाज को बांटने का आरोप लगा चुके हैं। पवार ने कहा कि मातृभाषा को कमजोर करने की किसी भी कोशिश का विरोध किया जाना चाहिए।







