
पटना : बिहार विधान सभा के अध्यक्ष नंद किशोर यादव ने कहा है कि आज के तनावपूर्ण समय में धार्मिक स्थलों की आवश्यकता और प्रासंगिकता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। व्यक्ति चाहे किसी भी प्रकार के तनाव से जूझ रहा हो — व्यावसायिक, पारिवारिक या सामाजिक — उसे मानसिक शांति और आत्मिक संतुलन धार्मिक स्थलों से ही प्राप्त होता है। वे वरिष्ठ पत्रकार सुबोध कुमार नंदन द्वारा लिखित और प्रभात प्रकाशन से प्रकाशित पुस्तक ‘पटना के देवालय’ के विमोचन समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि धार्मिक स्थल किसी भी धर्म के हों, वहां जाने से शांति मिलती है और मन का बोझ हल्का होता है।
सुबोध नंदन द्वारा लिखित यह पुस्तक बिहार की बहुधार्मिक परंपरा और आस्था के केंद्रों का संक्षिप्त, रुचिकर और संतुलित विवरण प्रस्तुत करती है, जो पाठकों को गहराई से जोड़ती है। नंद किशोर यादव ने कहा, “असल पटना तो पटना सिटी है, जो कभी भारत की राजधानी थी। बिहार का इतिहास गौरवशाली रहा है और यहां की सांस्कृतिक विरासत हजारों वर्षों पुरानी है। आज जहां छात्र विदेशों में पढ़ाई के लिए जाते हैं, वहीं एक समय था जब विदेशों से छात्र नालंदा विश्वविद्यालय में पढ़ने के लिए बिहार आते थे।” इस अवसर पर बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद के अध्यक्ष रणवीर नंदन ने कहा कि ‘पटना के देवालय’ केवल धार्मिक स्थलों की जानकारी नहीं देता, बल्कि यह पटना की सांस्कृतिक आत्मा और सामाजिक एकता का प्रतीक दस्तावेज है। उन्होंने इसे धार्मिक सह-अस्तित्व और सद्भाव को बढ़ावा देने वाली पुस्तक बताया। रणवीर नंदन ने कहा कि यह पुस्तक युवाओं को अपने शहर के ऐतिहासिक और आध्यात्मिक पक्ष से जुड़ने की प्रेरणा देगी। पुस्तक पढ़ने से मन केंद्रित होता है और कई समस्याओं का समाधान स्वत: मिलने लगता है।
बिहार चैंबर ऑफ कॉमर्स के पूर्व अध्यक्ष पी.के. अग्रवाल ने इस कृति को पटना की सांस्कृतिक विरासत पर आधारित एक महत्त्वपूर्ण दस्तावेज करार दिया। उन्होंने कहा कि बिहार की छवि को लेकर व्याप्त भ्रांतियों को यह पुस्तक बदलने की दिशा में कारगर साबित हो रही है। चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष सुभाष पटवारी ने लेखक की अब तक की पुस्तकों की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने बिहार की कला, संस्कृति और इतिहास को जन-जन तक पहुंचाने में उल्लेखनीय योगदान दिया है। लेखक सुबोध कुमार नंदन ने कहा कि ‘पटना के देवालय’ केवल एक पुस्तक नहीं, बल्कि यह उनके वर्षों की यात्राओं, अनुभवों और आस्था का जीवंत संकलन है।
उन्होंने विश्वास जताया कि यह पुस्तक न केवल धार्मिक, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से भी उपयोगी सिद्ध होगी। कार्यक्रम की अध्यक्षता और संचालन पद्मश्री विमल जैन ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन बिहार चैंबर ऑफ कॉमर्स के वरिष्ठ सदस्य आशीष शंकर ने किया। इस अवसर पर बिहार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष रामलाल खेतान, अरुण अग्रवाल, राजभाषा विभाग के निदेशक सुमन कुमार, डाक विभाग (बिहार सर्कल) के निदेशक पवन कुमार, कला-संस्कृति एवं युवा विभाग के पूर्व उप निदेशक अरविंद महाजन, अमर अग्रवाल, कमल नोपानी, अजय अग्रवाल, अजय गुप्ता और मुकेश जैन सहित कई गणमान्य अतिथि उपस्थित थे।






