
बिहार: बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के बेला इंडस्ट्रियल एरिया फेज-2 स्थित टेक्सटाइल पार्क अब एक बड़े रोजगार केंद्र के रूप में उभर चुका है। यहां अब तक लगभग 30 हजार लोगों को प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से रोजगार मिल चुका है। खास बात यह है कि यह क्षेत्र अब बैग निर्माण उद्योग का प्रमुख हब बनता जा रहा है, जिससे युवाओं में भारी उत्साह देखा जा रहा है। हाल ही में टेक्सटाइल पार्क में नई बैग निर्माण यूनिट की शुरुआत की गई है। अत्याधुनिक तकनीकों से सुसज्जित यह यूनिट करीब 48 हजार वर्गफीट क्षेत्रफल में फैली हुई है। यहां हर साल 8.4 लाख बैगों का निर्माण किया जाएगा। इन बैगों को जूट, पैराशूट फैब्रिक, कॉटन और अन्य टिकाऊ सामग्रियों से तैयार किया जा रहा है, जिससे यह यूनिट पर्यावरण-अनुकूल उत्पादों के निर्माण में भी अहम भूमिका निभा रही है। यूनिट में कुल 3500 सिलाई मशीनें लगाई गई हैं, जिनके माध्यम से 8 हजार लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिला है।
वहीं, परिवहन, फुटकर बिक्री और कच्चे माल की आपूर्ति जैसे परोक्ष क्षेत्रों से करीब 22 हजार लोग रोजगार से जुड़े हैं। मुजफ्फरपुर का टेक्सटाइल पार्क न केवल जिले को औद्योगिक पहचान दिला रहा है, बल्कि बिहार की आर्थिक और रोजगार संरचना को भी सशक्त बना रहा है। यहां बने बैगों की मांग देश-विदेश में लगातार बढ़ रही है। बैगों का निर्यात नेपाल, भूटान, म्यांमार के साथ-साथ मध्य प्रदेश, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और असम जैसे राज्यों में भी किया जा रहा है। मुजफ्फरपुर के जिलाधिकारी सुब्रत कुमार सेन ने बताया कि जिले में पहले से दो बैग निर्माण यूनिट कार्यरत थीं। एक टेक्सटाइल पार्क में और दूसरी बेला औद्योगिक क्षेत्र में। हाल ही में, 14 जून को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बेला में स्थापित एक नई यूनिट का उद्घाटन किया। इसके मात्र छह दिन बाद टेक्सटाइल पार्क में तीसरी यूनिट की स्थापना की गई है। अब तक मुजफ्फरपुर में तीन और पटना के बिहटा में एक यूनिट की स्थापना हो चुकी है।
इनसे कुल 27 हजार से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिल चुका है। इन फैक्ट्रियों में निर्मित बैग हल्के, मजबूत और उपयोग में आसान हैं। साथ ही, ये पर्यावरण के अनुकूल भी हैं, जिससे इनकी मांग प्लास्टिक बैग के विकल्प के रूप में तेजी से बढ़ रही है। स्थानीय युवाओं के लिए यह टेक्सटाइल पार्क एक सुनहरा अवसर लेकर आया है। अन्य जिलों और राज्यों से भी लोग यहां आकर आजीविका के नए अवसर तलाश रहे हैं। इन प्रयासों से बिहार, विशेषकर उत्तर बिहार, औद्योगिक विकास के नए युग में प्रवेश कर रहा है।






