उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश के कानपुर में तेज रफ्तार लैंबॉर्गिनी कार से हुए हादसे ने कानून-व्यवस्था और पुलिस की निष्पक्षता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। रविवार दोपहर ग्वाल टोली इलाके में हुई इस दुर्घटना में एक पैदल यात्री गंभीर रूप से घायल हो गया, जबकि घटना के बाद सामने आए वीडियो और FIR के बीच साफ विरोधाभास दिख रहा है।
जानकारी के मुताबिक, एक लैंबॉर्गिनी कार अनियंत्रित होकर सड़क से उतर गई और फुटपाथ पर चढ़ते हुए पहले खड़ी बुलेट मोटरसाइकिल, फिर एक ऑटो और अंत में पैदल चल रहे मोहम्मद तौफीक को टक्कर मार दी। हादसे में तौफीक के पैर में गंभीर चोटें आईं और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनकी हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है।
मामले में ग्वाल टोली थाने में दर्ज FIR में ड्राइवर को “अज्ञात” बताया गया है। जबकि हादसे के तुरंत बाद सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि एक युवक कार से बाहर निकलता है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, वीडियो में दिख रहा युवक एक स्थानीय कारोबारी का बेटा बताया जा रहा है, लेकिन इसके बावजूद उसका नाम FIR में दर्ज नहीं किया गया है। इसी बात को लेकर पुलिस की मंशा पर सवाल उठने लगे हैं।
विवाद तब और गहराया जब पुलिस स्टेशन के भीतर लैंबॉर्गिनी को चादर से ढकने और उसके पास प्राइवेट बाउंसरों की मौजूदगी के दृश्य सामने आए। स्थानीय लोगों और पीड़ित पक्ष का आरोप है कि पुलिस ने एक घायल आम नागरिक के बजाय लग्जरी कार और उसके मालिक को खास तवज्जो दी।
पुलिस का कहना है कि ड्राइवर को अचानक चक्कर या दौरा पड़ा, जिससे हादसा हुआ। हालांकि, इस मेडिकल दावे की जांच की जा रही है। सवाल यह भी उठ रहा है कि अगर ड्राइवर को पहले से ऐसी समस्या थी, तो उसे इतनी हाई-परफॉर्मेंस कार चलाने की अनुमति कैसे मिली।
फिलहाल पुलिस ने कार जब्त कर ली है और जांच जारी है, लेकिन FIR, वीडियो सबूत और पुलिस स्टेशन में हुए व्यवहार को लेकर जनता का भरोसा डगमगाता नजर आ रहा है।







